~ Be The Change ~

संध्या को समझ आई माँ की बात ~ रविन्दर सिंह

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हरियल वन में बहुत सारी तितली रहती थीं। उनमें छोटी सी संध्या तितली बहुत सुंदर थी। वो हमेशा हर जगह अपनी माँ के साथ ही जाया करती थी, क्योंकि माँ कहती थी कि अकेले ज्यादा दूर जाना खतरनाक होता है। उसकी उम्र की सभी तितलियाँ अपनी माँ से छुप कर अकेले नई नई जगहों पर घूमने जाती थीं। संध्या अपनी माँ की सलाह मानकर उनके साथ जाने से मना कर देती थी। इस वजह से सब दोस्त उसे चिढ़ाती थीं, और उसे अपने साथ खेलने भी नहीं देती थीं। इससे संध्या को बहुत दुःख होता था।

उसने अपनी माँ को ये बात बताई तो मम्मी तितली ने उसे समझाया कि बेटा! जब तुम अपना ध्यान खुद रखने लायक हो जाओगे, तब तुम अपनी मनचाही जगहों को देखने जा सकती हो। बाहर जंगल खतरनाक शिकारियों और इंसानों से भरा हुआ है, इसलिए मैं तुम्हारे भले के लिए ही तुम्हें अकेले बाहर जाने से मना करती हूँ। जो तुम्हारा मज़ाक उड़ाते हैं, वो नादान हैं। उन पर ध्यान मत दो। ऐसा कहकर माँ खाना लाने के लिए उड़ गयी।

जैसे ही वो अपने घर से बाहर निकली तो उसने अपनी कुछ दोस्तों को खेलते देखा, वो भी उनके साथ खेलने पहुंच गयी। लेकिन वो उस पर हँसने लगीं। इससे संध्या दुःखी होकर रोने लगी। ये देखकर सब डरकर इधर उधर छुप गयीं। थोड़ी देर में शांत होकर संध्या अपने घर चली गयी, उसकी दोस्तों को बहुत बुरा लग रहा था। उन्होंने तय किया कि वो कल जाकर संध्या से माफ़ी मांगेंगी और फिर कभी उसका मज़ाक नहीं बनाएँगी।

शाम को मम्मी ने संध्या को खाना खिलाकर सुलाया। देर रात एकदम से संध्या की नींद खुल गयी। वो घर से बाहर आई और आसमान में छाई अनगिनत छोटी छोटी रौशनियों को देखने लगी। वो उन्हें और पास से देखने के लिए ऊपर उड़ती गयी लेकिन वो सितारों को छू नहीं पाई। फिर उसकी नज़र सामने कीओर गयी, सामने रौशनी का एक गज़ब संसार नज़र आ रहा था। संध्या नहीं जानती थी कि वो अनजाने में शहर की तरफ जा रही है, उसे तो बस रौशनी को छूना था।

रौशनी का पीछा करते करते संध्या एक घर में घुस गयी। यहां उसने पहली बार रौशनी को इतने करीब से देखा। वो उसे छूने के लिए उसके बिल्कुल करीब जाकर बैठ गयी और रौशनी को निहारने लगी। इतने में एक इंसान उस कमरे में आया। लेकिन वो खतरे से बे-परवाह रौशनी की तरफ बढ़ने लगी। तभी इंसान ने उसे देख लिया और उसे पकड़ने के लिए लपका। संध्या घबराकर इधर-उधर उड़ने लगी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो इंसानी बच्चा उसे पकड़ने की कोशिशें कर रहा था पर संध्या उसके हाथ नहीं आई।

हर कोशिश के बाद भी जब बच्चा संध्या को नहीं पकड़ पाया तो वो जाल लेकर कमरे में आया। संध्या को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। संध्या डर गयी और अपनी माँ को याद करने लगी। जैसे ही बच्चा आगे बढ़ा, लाइट चली गयी। रौशनी बुझते ही संध्या को बाहर जुगनू काका दिखाई दिए। वो तुरन्त बाहर निकल आई।

वो जुगनू काका के साथ घर की तरफ उड़ गयी और घर जाकर माँ से लिपट कर चैन से सो गयी। अगले दिन उसकी दोस्तों ने संध्या से माफी मांगी और वादा किया कि आगे से वो हमेशा उसे अपने साथ खेलने देंगी और कभी उसे नहीं चिढ़ाएंगी । संध्या खुश होकर उनके साथ खेलने चली गयी और सबको माफ़ कर दिया।